सौतेली मां ने बेटे को उत्तेजित किया- 1

हैलो दोस्तों मैं आपके लिये अपनी best incest story in hindi लेकर आई हूं उम्मीद है आपको यह maa beta sex story बहुत उत्तेजित करेगी आप इस best incest story in hindi में पढ़ेगे कैसे सौतेली मां ने बेटे को उत्तेजित किया अब मैं इस maa beta sex story पर आती हूं

Best incest Story in Hindi

मेरा नाम कविता है मैं बिहार की रहने वाली हूं और मेरी उम्र 41 साल है हमारे परिवार में कुल चार सदस्य हैं मेरे पति का नाम सुरेश है जिनकी उम्र 46 साल है वह अपनी पहली पत्नी के निधन के बाद अकेले थे जिसके बाद हमारी शादी हुई इस तरह मैं उनकी दूसरी पत्नी हूं

भले ही मेरे पति की पहली पत्नी से उनके दो बच्चे हैं और उनसे मेरा कोई खून का रिश्ता नहीं है लेकिन अब वे मेरी ही संतान हैं मेरी बेटी का नाम सपना और बेटे का नाम अमित है मैं यहां आपको अपने बारे में कुछ बताना चाहती हूं

मेरे पति बैंक में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं हमारी बेटी सपना बी.कॉम प्रथम वर्ष की छात्रा है और बेटा अमित 12वीं कक्षा में साइंस की पढ़ाई कर रहा है हम सभी आपस में बहुत प्यार और खुशी से रहते हैं और एक-दूसरे का बहुत ख्याल रखते हैं

मैं खुद बी.ए. पास हूं हर मां की तरह मेरी भी यही इच्छा है कि मेरे बच्चे पढ़-लिखकर एक अच्छी नौकरी पाएं भले ही उन्होंने मेरे पेट से जन्म न लिया हो मुझे पूरा भरोसा है कि सपना को एक अच्छी नौकरी मिल जाएगी और फिर वह शादी करके अपने ससुराल चली जाएगी

लेकिन मुझे अमित की बहुत चिंता होती है वह बहुत बुद्धिमान है फिर भी अपनी बहन की तरह पढ़ाई पर ध्यान नहीं देता पिछले कुछ समय से तो उसका मन पढ़ाई से पूरी तरह हट गया है

मुझे लगता है कि किशोरावस्था में अक्सर बच्चों का ध्यान यहां-वहां भटक जाता है इसीलिए मैं उसे हमेशा समझाती रहती हूं कि वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे वह मेरी बात मानकर पढ़ाई करता भी है और परीक्षाओं में पास भी हो जाता है

लेकिन वह अपना ज्यादातर समय स्कूल के दोस्तों के साथ ही बिताता है मुझे इस बात की भी चिंता रहती है कि वह अभी से मुझसे आगे की पढ़ाई के लिए बैंगलोर जाने की ज़िद करता रहता है

यह सब सोचकर मैं परेशान हो जाती हूं मैं समझ नहीं पाती कि उसे खुद से इतनी दूर बैंगलोर कैसे भेजूं? मुझे हमेशा यह डर सताता रहता है कि कहीं वह वहां जाकर किसी गलत राह पर न चल पड़े क्योंकि मैं अमित से बहुत ज़्यादा प्यार करती हूं

एक दिन मुझे लगा कि इस बारे में अपनी सहेलियों से बात करके उनकी राय लेनी चाहिए इसलिए मैंने तुरंत अपनी सहेली को फोन किया और उसे अपनी पूरी परेशानी बताई

उसने मुझे इंटरनेट पर गूगल करने की सलाह दी उसने कहा कि अगर मैं वहां मां-बेटे के संबंध के बारे में सर्च करूं तो मुझे मेरे सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे

शाम को खाना बनाने के बाद मैंने वैसा ही किया मैंने इंटरनेट पर सर्च किया और मुझे अपनी बात का जवाब मिल गया इसके बाद मैंने अमित को नोटिस करना शुरू कर दिया अब मैं उसकी हर हरकत पर नज़र रखने लगी ताकि देख सकूं कि उसका व्यवहार मेरे प्रति कैसा है

मैंने देखा कि उसका व्यवहार सामान्य नहीं था इसके बाद मैंने उसके कमरे की तलाशी ली लेकिन मुझे कुछ नहीं मिला फिर मैंने उसका मोबाइल भी चेक किया पर वहां भी कुछ हाथ नहीं लगा आखिरकार मैंने उसकी पेन ड्राइव निकाली और उसे अपने लैपटॉप में लगाकर देखा

जब मैंने उसकी पेन ड्राइव देखी तो मेरा शक हकीकत में बदल गया मुझे वह सब मालूम हो गया जो मैं सोच रही थी मैंने देखा कि उसकी पेन ड्राइव में नंगी लड़कियों के फोटो थे और मैं समझ गई कि अब अमित बड़ा हो गया है

फिर मैंने वही किया जो मुझे एक मां के तौर पर करना चाहिए था मैंने सोचा कि कहीं बाहर जाकर यह कोई ऐसी गलती न कर बैठे जिससे इसकी पूरी जिंदगी खराब हो जाए इसलिए मैंने तय किया कि क्यों न मैं खुद ही उसे इन सब बातों के बारे में समझाऊं

मैंने एक दोस्त की तरह उससे इन सब बातों पर चर्चा करने की कोशिश की लेकिन वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था शायद वह मुझसे शर्मा रहा था जब भी मैं उसे कुछ समझाने की कोशिश करती वह मेरी बातों को अनसुना कर देता था

जब मैंने अपने पति से इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि वह समय के साथ अपने आप सब समझ जाएगा लेकिन मेरा मन मानने को तैयार नहीं था मुझे लगातार यही डर सता रहा था कि कहीं अमित से कोई बड़ी गलती न हो जाए या वह भी अपने स्कूल के दोस्तों की तरह गलत रास्ते पर न चल पड़े

आखिरकार मैंने फैसला किया कि मुझे ही कुछ कदम उठाना होगा क्योंकि एक मां ही अपने बेटे की सबसे अच्छी दोस्त हो सकती है

मैंने सोचा कि केवल किताबी बातों या थ्योरी के बजाय उसे व्यावहारिक तरीके से जीवन की सही समझ दी जाए और मुझे यही आखिरी रास्ता लगा मैं इसे गलत नहीं मानती थी इसलिए मैंने वही किया जो मुझे एक मां के तौर पर सही लगा

अब मैं अमित को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करने लगी अमित अब बड़ा हो चुका था इसलिए मुझे ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी मैं उसे बचपन से ही नहलाती आ रही थी और आज भी यह सिलसिला जारी था भले ही वह अब 18 साल का वयस्क हो चुका था फिर भी मैं ही उसे नहलाती थी

आज से मेरा इरादा कुछ अलग था हमेशा मैं पहले अमित को नहलाती थी और फिर खुद नहाती थी लेकिन आज मैंने पहले नहाने का फैसला किया मैं बाथरूम में नहाने चली गई और फिर सोचा कि क्यों न अमित को भी नहाने के लिए यहीं बुला लूं यह सोचकर मैंने अमित को आवाज लगाई

सर्दियों के दिन थे, इसलिए मैंने बाथरूम से आवाज लगाई- अमित जरा गर्म पानी दे देना अमित जैसे ही गर्म पानी लेकर बाथरूम के अंदर आया और उसने मुझे देखा तो वह हैरान होकर बस देखता ही रह गया

उसने पहली बार मुझे इस नज़र से देखा था वो मेरे मम्में देख रहा था जो ब्लाउज में से थोड़े बाहर निकल रहे थे मैंने अपनी साड़ी उतार रखी थी और मैं ब्लाउज और पेटीकोट में थी

मैंने अमित की तरफ देखा और सहजता से कहा- तू भी यहीं नहा ले

उसने झिझकते हुए मना किया और कहा- नहीं पहले आप नहा लो मैं बाद में नहा लूंगा

मैंने उससे कहा- तुझे स्कूल के लिए देर हो जाएगी और मुझे नहाने में अभी समय लगेगा आजा पहले मैं तुझे ही नहला देती हूं मेरी यह बात सुनकर वह मान गया

मैं जैसे ही गरम पानी मिलाने के लिये नीचे झुकी तो मेरे मम्में ब्लाउज में से और ज़्यादा बाहर आ गये थे और अमित मेरे मम्में ही देखे जा रहा था उसकी नज़र हट ही नहीं रही थी और फिर मैं भी तो यही चाहती थी

फिर मैंने अमित को अपने कपड़े उतारने के लिये कहा उसने कपड़े उतार लिये वो सिर्फ अंडरवियर पहने हुये था मैंने उसके ऊपर पानी डाला और उसे नहलाने लगी वो भी आज बड़े मज़े से नहा रहा था

नहाते हुये पानी भी उछाल रहा था जिससे मैं और मेरे कपड़े भी गीले हो गए मैंने कले रंग का ब्लाउज पहना हुआ था और सफ़ेद ब्रा जो कि भीगे हुये ब्लाउज में से साफ दिख रही थी भीगे हुये ब्लाउज में से मेरे मम्में भी नज़र आ रहे थे जिसे अमित नज़र चुरा कर देख रहा था

अमित अब नहा चुका था मैंने उसे स्कूल जाने के लिये जल्दी से तैयार होने के लिये कहा और वो बाथरूम से जाने को हुआ तभी मैंने उसे रोक लिया और कहा अमित जरा रुक जा मेरे पीठ घिस देना बहुत मैल जम गया है

वो रुक गया वो अभी भी भीगा हुआ था और सर्दी से काँप रहा था उसने तौलिया से अपना बदन पौंछ लिया और मेरे पीछे खड़ा हो गया मैंने भी सोचा कि अमित को और सताया जाये

मैंने नहाने के लिये अपने ऊपर पानी डाला और साबुन लगाने लगी मैंने अपना ब्लाउज भी उतार लिया और अपनी ब्रा भी और फिर मैंने अमित को पीठ पर साबुन लगाने के लिये कहा

वो मेरी पीठ पर साबुन लगाने लगा वो मेरे पीछे खड़ा था इसीलिए वो मेरे मम्में नहीं देख पा रहा था तो वो बाथरूम में लगे दर्पण में से मेरे मम्में देख रहा था और अब उसकी लंड खड़ी हो गई

जो साबुन लगाते समय मैं कभी कभी अपने पीछे महसूस कर रही थी अमित को भी शायद अब मज़ा आने लगा था क्योंकि साबुन लगाते समय वो मेरे मम्में को बगल से छूने की कोशिश कर रहा था मैं भी कुछ नहीं बोल रही थी

मेरे मम्में काफी बड़े हैं और ऊपर से मेरा बदन भी गोरा है मुझे देख कर हर कोई आहें भरता है मैंने भी उसका साथ दिया और मैंने महसूस किया कि मेरे कुछ ना कहने पर उसे और भी मज़ा आने लगा उसने इस बार अपनी लंड मेरे पीछे से स्पर्श की और मुझे महसूस कराया

मैंने कहा- क्या कर रहा है?

वो डर गया कि कहीं मां मुझे डांटें ना

लेकिन मैंने कहा- तेरा ध्यान किधर है? ठीक से साबुन क्यूं नहीं लगाता?

वो बोला- हां लगा तो रहा हूं

मैंने बोला- पीठ पर ही लगाता रहेगा या थोड़ा छाती पर आगे भी लगायेगा

उसने अपने हाथ आगे की तरफ बढ़ाये और अब वो मेरे मम्मों के उभारों पर साबुन लगाने लगा तभी मुझे उसका लंड पीछे से थोड़ा और महसूस हुआ

लेकिन इस बार उसने अपनी लंड मेरे पीछे लगाए रखी और अब अमित ने साबुन लगाते हुये ही मेरे मम्में धीरे धीरे दबाने लगा जिससे मुझे भी अजीब सा नशा छाने लगा

मैं भी मज़ा ले रही और कुछ नहीं बोल रही थी क्योंकि मुझे ऐसा कभी भी महसूस नहीं हुआ था अमित के अंडरवियर पहने होने के कारण उसकी लंड ठीक से मुझे महसूस नहीं हो रही थी

तो अमित ने हिम्मत करके अपनी अंडरवियर में से लंड को बाहर निकाल कर मेरे पीछे की दरार में लगाया जो मुझे काफी हद तक महसूस हुआ

अमित मेरे मम्मों पर साबुन लगाते हुये उनको मसलने लगा लेकिन मैंने अभी भी कुछ नहीं कहा अब वो शायद बहुत उत्तेजित हो गया था लेकिन मैंने सोचा कि बस बहुत हुआ अमित के लिये अभी के लिये इतना ही काफी था

मैंने उससे कहा- बस साबुन लग गया है

तो वो बोला- मां हाथ पैरों पर भी साबुन लगा दूं क्या?

नहीं मैं लगा लूंगी मेरा हाथ पीठ पर नहीं जाता ना इसलिए तुझे बुलाया था बस अब मैं नहा लूंगी तुम जाओ तुम्हें स्कूल के लिये देर हो रही है वो जाने लगा

मैंने देखा कि अमित की लंड काफी बड़ी दिख रही थी जो अभी तक खड़ी हुई थी मैंने सोचा कि क्यूं ना अभी ही सारी प्रॅक्टिकल नॉलेज दे दूं फिर मुझे याद आया कि उसे स्कूल भी तो जाना है बाकी ज्ञान शाम को सोते समय दे दूंगी और वैसे भी सब्र का फल मीठा होता है

मैंने नहाने के बाद नाश्ता बनाया अमित ने नाश्ता किया और उसके लिये मैंने लंच बॉक्स उसके बैग में रख दिया अमित स्कूल चला गया और फिर मैं घर के सारे काम करने में व्यस्त हो गई और पता भी नहीं चला कि कब दोपहर के दो बज गये फिर मैंने थोड़ा आराम किया

नींद खुली तो शाम के चार बज चुके थे अमित भी घर आ चुका था मैंने उसके लिये चाय बनाई और वो थोड़ी देर बाद कोचिंग के लिये निकल गया तभी सपना क्लास से आ गई मैंने उसको भी चाय दी

वो अपने कमरे मैं चली गई अब शाम के सात बज चुके थे मेरे पति भी आ चुके थे मैंने फिर चाय बनाई और अपने पति को दी वे चाय पीने के बाद अपने कमरे में चले गये

थोड़ी देर आराम करने के बाद मेरे पति और मेरी बेटी दोनों ही साथ मैं गार्डन में घूमने चले गये मैं डिनर तैयार करने लगी और डिनर तैयार करते हुये मुझे पता ही नहीं चला कि कब 8:30 बज गये सपना और मेरे पति दोनों गार्डन से घूम कर आ चुके थे

सपना ने कहा- मां खाना लगा दो

मैंने अपने पति से पूछा- आपके लिये भी खाना लगा दूं क्या?

उन्होंने कहा- हां लगा दो

मैंने दोनों के लिये खाना लगाया तो मेरे पति ने कहा तुम भी खाना खा लो

मैंने कहा- नहीं आप दोनों खा लो मुझे अभी भूख नहीं है

सपना ख़ाना खाने के बाद अपने कमरे में चली गई और मेरे पति भी अपने कमरे में चले गए टीवी देखने लगे अब रात के 9:20 बज चुके थे और मैं भी कमरे में जाकर उनके साथ टीवी देखने लगी

10 मिनट बाद ही अमित आ गया मैंने गेट खोला और पूछा इतनी देर क्यूं लगा दी?

तो बोला- मां साइकल पंचर हो गई थी इसलिए देर हो गई

ठीक है खाना लगा देती हूं हाथ मुंह धो लो मैंने टेबल पर खाना लगाया अमित खाना खाने लगा लेकिन और दिन की तरह आज उसका चेहरा चमक रहा था वो बहुत खुश लग रहा था

खाने खाते हुये मुझसे बोला- मां आज मेरे टैस्ट में 10 में से 10 नंबर आए हैं

मैं भी खुश हो गई तभी अमित ने थोड़ी सब्जी मांगी और मैं सब्जी परोसने के लिये जैसे ही झुकी तो मेरे मम्में भी ब्लाउज में से थोड़े बाहर आ गये तभी अमित की नजर मेरे मम्मों पर पड़ी वो उन्हें देख रहा था और मुझे पता भी नहीं था कि अमित मेरे मम्में देख रहा है

मैंने जैसे ही अमित की तरफ देखा तो मुझे पता चला कि अमित का ध्यान खाने पर नहीं बल्कि मेरे उभारों पर था उसकी नज़रें छुप छुप कर मेरे मम्मों को निहार रही थीं

मैं भी उसे अपने मम्में दिखाने के लिये थोड़ी झुक कर खड़ी हो गई दोनों हाथ मेज पर रख दिए जिससे मेरे मम्में अब और भी अच्छी तरह से दिख रहे थे

अमित खाना खाते खाते उन्हें देख रहा था और मैं अपनी नज़र इधर उधर कर रही थी जिससे कि अमित को पता ना चले की मैं उसे देख रही हूं अमित खाना खा लिया था

फिर भी वो वहीं बैठा हुआ था और खाना खाने का बहाना कर रहा था मुझसे बातें भी कर रहा था क्योंकि वो मेरे मम्मों को ज़ी भर कर देखना चाहता था

लेकिन थोड़ी देर अमित बोला- मां क्या आपने खाना खाया?

मैंने कहा- नहीं मैं खा लूंगी तुम खाओ अभी

अमित ने कहा- मां आप भी जल्दी खाना खा लिया करो कितना काम करती हो आप चलो आप मेरे साथ ही खाना खा लो

मैंने भी उसकी बात नहीं टाली और उसके बगल में जाकर बैठ गई और हम एक ही थाली में खाना खाने लगे लेकिन अभी भी अमित की नज़र मेरी छाती पर ही थी

मैंने भी जल्दी से खाना खाया और कहा- मैंने खाना खा लिया है तुम्हें और खाना है?

वो बोला- नहीं

मैंने वहां से सारे बर्तन उठाए और अमित अपने रूम में चला गया मैंने सारे बर्तन धोकर दूध गर्म किया और सपना को दिया और फिर मैं अमित के कमरे में दूध देने गई और अमित को दूध दिया वो अभी पढ़ाई कर रहा था

मैंने उसे कहा- दूध ध्यान से पी लेना

तभी अमित ने कहा- दूध दो तो मैं पी ही लूंगा

उसने यह बात इस तरह से की जो वो परोक्ष मुझसे जो कहना चाहता था वो उसने कह दिया और मैं भी उसकी बात का मतलब समझ गई ठीक है लेकिन ध्यान से पी लेना भूलना नहीं और फिर मैं वहां से आ गई

मेरे पति रूम में अभी तक टीवी देख रहे थे और साथ में ड्रिंक भी ले रहे थे

तभी मैंने उनसे कहा- मैं ड्रिंक बना दूं?

तो उन्होंने कहा- क्या बात है आज बड़ी खुश लग रही हो?

मैंने कहा- बस यूं ही और मैं ड्रिंक बना कर उन्हें देती जा रही थी जिससे उन्हें काफी नशा हो जाये और वो जल्दी से सो जाएं और सुबह भी देर से उठें वैसे भी कल तो संडे है

बाकी कहानी maa beta sex story के अगले भाग सौतेली मां ने बेटे को उत्तेजित किया- 2 में पढ़ें

Leave a Comment