हैलो दोस्तो मेरा नाम मयंक है यह मेरी पहली antervasna sali sex story है दोस्त की साली की चुदाई की कुछ गलत लगे तो मुझे माफ कर देना आप इस antervasna sali sexy kahani में पढ़ेगे कैसे मैंने अपने दोस्त की साली की चुदाई की
Antervasna Sali Sex Story
यह antervasna sali sex story आज से लगभग पांच साल पहले की बात है जब मेरी शादी नहीं हुई थी उस समय मैं और मेरे दोस्त का पूरा परिवार मिलकर एक बेहद खास यात्रा पर निकले थे
कुंवारेपन के वे दिन बहुत ही मजेदार थे इसलिए उस सफर को लेकर हम सब में एक अलग ही उत्साह था दोनों परिवारों का एक साथ जाना हमारे लिए एक बहुत बड़ा और अनोखा अनुभव था
मेरे दोस्त के साथ उस यात्रा पर उनका पूरा परिवार मौजूद था जिसमें उनकी भांजी और उनकी साली भी शामिल थीं दोस्त की साली का नाम सुषमा था जिनकी उम्र 23 साल थी और उनकी भांजी का नाम नेहा था जो अभी केवल 19 साल की थीं
इन दोनों युवा सदस्यों के हमारे साथ होने की वजह से सफर का पूरा माहौल बहुत ही ज्यादा खुशनुमा और मजेदार बन गया था
शुरू में मुझे बिल्कुल भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि वे दोनों भी इस यात्रा में हमारे साथ शामिल होने वाली हैं हमारी यह यात्रा भारतीय रेल से शुरू हुई थी और शुरुआत में सब कुछ बिल्कुल सामान्य और शांत चल रहा था
ट्रेन के सफर के बाद हम सब अपनी तय की हुई मंजिल पर सुरक्षित पहुंच गए थकावट काफी ज्यादा थी इसलिए हमने बिना समय गंवाए रात को रुकने के लिए एक बढ़िया सा रूम लिया और आराम से सो गए
सुबह जल्दी उठकर हम सबने सबसे पहले भगवान के पावन दर्शन किए और मन को शांति मिलने के बाद वापस अपनी रुकने वाली जगह पर लौट आए दोपहर का समय होने पर सभी ने मिलकर पेट भरकर खाना खाया और थकावट दूर करने के लिए थोड़ी देर कमरे में ही आराम किया
इसके बाद शाम के वक्त हम सब लोग बाहर घूमने के लिए निकले क्योंकि हमें घूमने के लिए केवल आस पास के स्थानीय एरिया में ही जाना था और अगले दो दिनों तक वहीं की मुख्य जगहों को देखना था इसलिए हम सभी ने आपस में सलाह मशवरा करके तय किया और पूरे ग्रुप के लिए एक बस किराए पर ले ली
बस की यात्रा शुरू हुई और मैं बस की सबसे आखिरी वाली सीट पर जाकर बैठ गया था बस में यात्रियों की वजह से सुषमा को बैठने के लिए कोई जगह नहीं मिल पाई और वह काफी देर तक वहीं खड़ी रही
कुछ समय बीतने के बाद जब उससे और खड़ा नहीं रहा गया तो वह आई और सीधे बस की सीट पर मेरे घुटनों पर बैठ गई उस समय तक मेरे मन में उसे लेकर किसी भी तरह का कोई गलत विचार या भावना नहीं आई थी
बस लगातार आगे की तरफ चलती रही और रास्तों के झटकों के कारण वह बार-बार हिलती रही उसके इस तरह लगातार होने वाले शारीरिक स्पर्श ने धीरे-धीरे असर दिखाना शुरू कर दिया और मेरे मन के अंदर की सुप्त भावनाएं अचानक बदलने लगीं
इसी बीच मेरा लंड अपने आप ही खड़ा हो गया और उसे टच करने लगा इस बात का अहसास सुषमा को भी अच्छी तरह से हो चुका था कि मेरे मन में क्या चल रहा है
मैंने औपचारिकता निभाते हुए उसे अपने घुटनों से उठने के लिए भी कहा लेकिन उसने मेरी बात को पूरी तरह अनसुना कर दिया और अपनी जगह से बिल्कुल नहीं उठी शायद वह भी लंड के स्पर्श का पूरा आनंद ले रही थी
हम दोनों एक दूसरे से बिना कुछ बोले ही उस जादुई पल का पूरा आनंद लेने लगे सफर के दौरान जब भी कोई नया स्टॉप आता तो हम बड़ों के साथ बस से नीचे उतर जाते और आस पास की जगह पर सामान्य रूप से घूमने लगते थे
लेकिन जैसे ही घूमने के बाद हम वापस बस में अपनी पुरानी जगह पर आकर बैठते तो वह पहले से भी ज्यादा करीब आ जाती थी और जानबूझकर और ज्यादा चिपक कर लंड का स्पर्श पाने की पोजीशन में खुद को सेट कर लेती थी
इसी तरह हमारी दो दिनों की वह खूबसूरत यात्रा समाप्त हो गई वह जगह एक अनजान बाहर गांव था और वहां सुषमा के परिवार के तमाम लोग लगातार साथ मौजूद थे
इस वजह से हमारे बीच चाहकर भी आगे कुछ नहीं हो सकता था और न ही उस सफर में कुछ आगे बढ़ सका बस इतना ही हुआ कि उस आखिरी वक्त तक उसने और मैंने एक दूसरे का साथ पाने की गहरी लालसा बिना कुछ बोले ही एक दूसरे के दिलों तक पूरी तरह पहुंचा दी थी
फिर हम सब अपनी यात्रा पूरी करके वापस अपने घर की ओर निकलने लगे वापसी के लिए हमारी रात की ट्रेन थी पर परेशानी यह थी कि हमारी कोई भी सीट कन्फर्म नहीं हो पाई थी
इसके बावजूद हम लोग हिम्मत करके बिना किसी रिजर्वेशन के ही ट्रेन के डिब्बे में सवार हो गए हम सब के दिमाग में बस यही बात चल रही थी कि रास्ते में जैसे ही टीटीई मिलेगा हम उससे बात करेंगे और कुछ न कुछ जुगाड़ करके सीटों का इंतजाम करवा लेंगे
लेकिन हमारा नसीब खराब था या फिर सिर्फ मेरा ही अच्छा था इस बात का असली पता तो मुझे काफी बाद में चला था हुआ यूं कि ट्रेन में बहुत ज्यादा भीड़ होने के कारण सब लोग जैसे-तैसे अलग-अलग डिब्बों और सीटों पर एडजस्ट हो गए थे
इसके बाद मैंने खुद हिम्मत दिखाई और चलते सफर में टीटीई को ढूंढकर उससे मुलाकात की और किसी तरह अपने लिए एक सीट कन्फर्म करवा ली
इस पूरे घटनाक्रम को बीते हुए लगभग दो घंटे का समय निकल चुका था और ट्रेन अपनी रफ्तार में आगे बढ़ रही थी सभी लोगों ने अपना-अपना भारी सामान उसी एक कन्फर्म सीट के पास नीचे रख दिया और आराम पाने के लिए आस-पास की खाली जगहों पर फैल गए
अब उस मुख्य सीट पर बैठने के लिए सिर्फ मेरे दोस्त की पत्नी यानी मेरी भाभी और उनकी छोटी बहन सुषमा ही बची थीं जो वहां आराम से बैठ गई
इस सब भागदौड़ और सीटों की व्यवस्था करने में रात के बारह कब बज गए मुझे इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं हुआ फिर जब मैंने जैसे-तैसे सभी लोगों के लिए रुकने का जुगाड़ कर लिया और सबको अपनी-अपनी जगहों पर सुला दिया
तब जाकर मुझे अपने सामान की याद आई मैंने उस सीट के पास रखे सामान को संभालने का सोचा और तुरंत पैर बढ़ाते हुए उधर की तरफ ही निकल पड़ा
वहां पहुंचने के बाद मैंने देखा कि भाभी थकावट की वजह से नीचे फर्श पर ही चादर बिछाकर सो गई थीं और सुषमा ऊपर की बर्थ पर अकेली अपने पैरों को सिकोड़कर बैठी हुई थी क्योंकि वह ट्रेन के डिब्बे की सबसे आखिरी वाली सीट थी
इसलिए वहां कोने में प्राइवेसी थोड़ी ज्यादा थी और ऊपर की सीटों पर लेटे हुए दोनों सहयात्री भी गहरी नींद में सो चुके थे
वहां थोड़ी खाली जगह देखकर मैं भी सुषमा के साथ ही सीट पर बैठ गया पिछले दो दिनों की ट्रिप की वजह से अब तक सुषमा और मेरे बीच एक बेहतरीन तालमेल और दोस्ती बन चुकी थी जिसके कारण उसने मुझे पास बैठने से मना नहीं किया
फिर खामोशी को तोड़ते हुए हमारी आपस में बातचीत शुरू हो गई और देखते ही देखते हम कॉलेज के किस्सों से लेकर अपनी पर्सनल लाइफ की बातें एक दूसरे से शेयर करने लगे
अब तक मेरे दिल और दिमाग के अंदर किसी भी तरह की कोई गलत बात या भावना नहीं चल रही थी पर तभी अचानक ट्रेन का एक ऐसा तेज झटका लगा जिसने हमारे बीच की पूरी स्थिति को बदल कर रख दिया
हुआ यूं कि उस झटके की वजह से उसका नाजुक हाथ सीधे मेरे हाथों से जा टकराया फिर जब हम दोनों ने अचंभित होकर एक दूसरे की तरफ देखा तो वह शरमा गई और उसने अपनी नजरें नीचे झुका लीं
मैंने उसके हाथ को अब तक छोड़ा नहीं था और अपनी उंगलियों से उसके हाथ को धीरे-धीरे सहलाने लगा था वह इस पर कुछ भी नहीं बोली और पूरी तरह शांत रही
बस फिर क्या था अब तक रात के करीब दो बज चुके थे और डिब्बे में चारों तरफ गहरा अंधेरा और सन्नाटा था जिसकी वजह से किसी के भी द्वारा हमें देखने का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता था
फिर भी मैं सावधानी पूर्वक आगे बढ़ा और उसके पैर को सहलाया वो कुछ नहीं बोली इससे मेरी हिम्मत बढ़ी मैं उसके पांव को सहलाता रहा
फिर चुप्पी को तोड़ते हुए खुद सुषमा ने ही आगे बात बढ़ाने की पहल की और मुझसे सीधे पूछ लिया कि क्या आपकी कोई गर्लफ्रेंड है? उसका यह अचानक पूछा गया सवाल सुनकर मैं एक पल के लिए पूरी तरह से हैरान रह गया और मेरे पास तुरंत देने के लिए कोई जवाब नहीं था क्योंकि मैं उस समय पूरी तरह सिंगल था
मैंने बिना एक पल भी गंवाए तुरंत उसे ना कह दिया और यह पूरी तरह से सच भी था क्योंकि उस समय तक मेरी जिंदगी में कोई भी लड़की नहीं थी मेरा यह साफ और सीधा जवाब सुनकर सुषमा के चेहरे पर एक अजीब सी राहत और मुस्कुराहट तैर गई
फिर ऐसे ही सहलाते हुए गर्मी में सफर चल रहा था अब मैंने हिम्मत करके उसकी छाती पर हाथ लगाया तो उसके मुंह से ऊहह्ह आह्ह्ह की आवाज आई मैंने उसकी तरफ देखा तो वो मुस्कुरा दी
मैंने बेहिचक उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया वो मेरे लंड को सहलाने लगी ऐसे ही 10 मिनट तक लंड सहलाने के बाद मैंने उसको इशारा किया कि टॉयलेट में चलो
मैं उसे इशारा करके आगे बढ़ गया और वो भी 2-3 मिनट बाद आ गई उसके अंदर आते ही मैंने टॉयलेट का दरवाजा बंद किया और उस पर टूट पड़ा जहां जी चाहा वहां सहलाने लगा उसने नाईट पैंट और टी-शर्ट पहनी थी
मैं उसकी टी-शर्ट के अंदर हाथ डालकर मम्मों को मसलने लगा वो चुदासी तो थी ही एकदम से बहुत गर्म हो गई फिर मैंने उसकी पैंट में हाथ डाल कर उसकी चूत में फिंगरिंग की उसने भी अपनी टांगें फैला दीं ताकि उसकी चूत में मेरी उंगलियां ठीक से चल सके उसकी चूत एकदम से गीली थी
उसके बाद मैंने उसकी पैंटी नीचे कर दी और नीचे बैठ कर उसकी चूत में अपना मुंह लगा दिया मेरी जीभ के स्पर्श ने उसे मजा दे दिया मैं अपनी जीभ उसकी चूत के अंदर डाल कर उसे मजा देने लगा वो ऊपर उसका मुंह अपने हाथों से दबा कर ऊहह्ह ओह्ह्ह कर रही थी
मैं उसकी चूत चाटने के साथ ही अपने हाथ ऊपर करके उसके रसीले मम्मों को अपने हाथों से मसल रहा था कुछ ही मिनटों में वो गांड उठाते हुए झड़ गई
फिर मैंने उसको नीचे बिठा दिया और मैं खड़ा हो गया मैंने अपना 7 इंच का लंड हवा में लहरा दिया उसने लंड हाथ में ले लिया और उसे सहलाने लगी
मैंने जोर देकर कहा- मुंह में ले लो
तो वो सर हिलाते ना बोलने लगी
फिर मैंने थोड़ा जोर देकर कहा- टेस्ट तो करो मजा आएगा
इस बार वो मान गई उसने मेरा लंड अपने मुंह में भर लिया और मुझे मजा देने लगी कुछ एक मिनट तक चूसने के बाद उसने छोड़ दिया मैंने भी उससे कुछ नहीं कहा
फिर वो अपने हाथों से लंड सहलाने लगी कुछ ही सेकंडों में मेरा रस निकल गया फिर हम चुपचाप नजर बचाते हुए बाहर आ गए और अपनी जगह पर बैठ गए
इसके आगे ट्रेन में कुछ ना हो सका हम दो दिनों की यात्रा पूरी करके वापस अपने शहर लौट आए और घर आते ही मैं दोबारा अपने रोजमर्रा के काम-काज में व्यस्त हो गया
इस बात को बीते अभी लगभग एक हफ्ता ही हुआ था कि अचानक एक दिन मेरे फोन पर नेहा का कॉल आया उसने मुझसे बात करते हुए सीधा एक बहुत बड़ा बम गिराया कि वह सफर के दौरान सुषमा और मेरे बीच हुई सारी बातों और खेल को अच्छी तरह जान चुकी है
उसकी यह चौंकाने वाली बात सुनते ही मैं अंदर से पूरी तरह डर गया और मुझे समझ नहीं आया कि अब क्या कहूं
उसके दूसरे दिन नेहा का फिर से कॉल आया पहले तो मैंने डर के मारे फोन नहीं उठाया फिर बहुत हिम्मत करके डरते डरते कॉल उठाया तो सामने नेहा नहीं बल्कि खुद सुषमा थी
उसने मुझे शांत करते हुए बताया कि उसने ही खुद नेहा को हमारे बीच की सब बात बताई है और वह घर में किसी को भी कुछ नहीं बताएगी सुषमा के मुंह से यह भरोसा मिलने के बाद तब जाकर मेरी जान में जान आई और मेरी घबराहट थोड़ी कम हुई
फिर उसने बहुत ही साधारण सी बातें करके फोन रख दिया उस बातचीत के बाद मैं थोड़ा शांत हुआ ही था कि उसी दिन तकरीबन चार बजे मेरे पास फिर से एक कॉल आया इस अचानक आए फोन ने मुझे एक बार फिर सोच में डाल दिया कि आखिर अब क्या नई बात सामने आने वाली है
मैंने जैसे ही फोन उठाया तो दूसरी तरफ से सुषमा बोली कि मेरा आपसे मिलने का बहुत मन हो रहा है क्या आप मुझसे मिल सकते हो? उसका यह सीधा और अचानक आया प्रस्ताव सुनकर मैं एक पल के लिए पूरी तरह सोच में पड़ गया क्योंकि मुझे इस बात की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि वह इतनी जल्दी मुझसे दोबारा मिलने की इच्छा जताएगी
मैंने उसके इस प्रस्ताव पर तुरंत हां बोल दिया क्योंकि अंदर से मैं भी उससे दोबारा मिलने के लिए बहुत उत्सुक था फिर हम दोनों ने आपस में बातचीत करके शहर के एक बड़े मॉल में शाम के ठीक छह बजे मिलने का समय तय किया
मैं अपने वादे के मुताबिक समय से थोड़ा पहले ही वहां पहुंच गया और मॉल के मुख्य गेट के पास खड़े होकर बेसब्री से उसकी राह देखने लगा
वह अपने तय समय से केवल दो मिनट बाद ही मेरे सामने से आती हुई दिखाई दी उस समय उसने एक खूबसूरत गुलाबी रंग की वनपीस ड्रेस पहन रखी थी जिसमें वह बेहद लाजवाब और आकर्षक लग रही थी मैं तो बस उसे देखते ही पूरी तरह से उसी के ख्यालों में खो गया
जब वह मेरे बिल्कुल नजदीक आ गई और उसने मेरी इस खोई हुई हालत को देखा तो वह पहले तो खिलखिलाकर खूब हंसी उसकी हंसी देखकर मैं भी थोड़ा शरमाते हुए मुस्कुरा दिया
मॉल के गेट पर एक-दो मिनट यूं ही सामान्य बातचीत करने के बाद हम दोनों मॉल के अंदर आ गए वहां एक शांत कॉफी स्टाल को देखकर हम वहां बैठ गए और मैंने दो कॉफी का आर्डर दे दिया
फिर हम दोनों टेबल के आमने-सामने बैठकर एक दूसरे से बातें करने लगे शुरुआत में तो बस इधर-उधर की बहुत ही सामान्य बातें हो रही थीं लेकिन तभी मैंने बातचीत का रुख बदलते हुए ट्रेन वाली उस रात का जिक्र छेड़ दिया
मेरी बात सुनते ही वह जिस तरह से शरमाई थी आह उसकी वह लाजवाब शर्म मुझे आज भी पूरी तरह याद है हमारी इस मीठी गुफ़्तगू के बीच ही तब तक वेटर कॉफी लेकर वहां आ गया
कॉफी की चुस्कियां लेते हुए मैंने उसकी आंखों में झांका और धीरे से उससे बोला कि आगे क्या? मेरा यह सीधा सवाल सुनकर वह अपनी कॉफी का कप हाथ में पकड़े हुए एक पल के लिए रुक गई और बहुत ही रहस्यमयी ढंग से मुस्कुराने लगी मानो उसके मन में पहले से ही आगे का पूरा प्लान तैयार था
वह मेरे इस सवाल के पीछे का असली मतलब बहुत अच्छी तरह से समझ गई थी पर उसने अपने मुंह से कुछ भी नहीं बोला और पूरी तरह खामोश रही उसकी इस चुप्पी और चेहरे के हाव-भाव से साफ लग रहा था कि वह भी अंदर ही अंदर वही सोच रही थी जो इस समय मेरे दिमाग में चल रहा था
मैंने ही फिर बोला- चलो कुछ मजे करने चलते हैं
वो कुछ नहीं बोली मैं समझ गया कि ये राजी है आज मजा नहीं लिया तो कभी नहीं मिलेगा मैंने तुरंत कॉफी के पैसे दिए और उसका हाथ पकड़ कर बाहर आने का इशारा किया जब वह अपनी सीट से उठी तो मैंने धीरे से उसका हाथ छोड़ दिया
इसके बाद मैं आगे की तरफ चल दिया और वह बहुत ही शालीनता के साथ मेरे पीछे-पीछे आने लगी हम दोनों बिना कोई समय गंवाए अपनी आगे की मंजिल की तरफ निकल पड़े
वो थोड़ा नाटक कर रही थी कि कोई देख लेगा
मैं बोला- कोई नहीं देखेगा तुम चलो तो सही
मैंने अपनी कार निकाली और उसको अंदर बिठा लिया
तभी वो बोली- इधर मेरी एक्टिवा रखी है
मैं बोला- कोई चिंता की बात नहीं है हम 2 घंटे में वापस आ जाएंगे
वो मान गई हम हाईवे के तरफ निकल पड़े कोई 20 मिनट के दौरान मैंने उसको खूब सहलाया वो बहुत ही गर्म हो चुकी थी हम एक होटल में आ पहुंचे पहले मैंने अकेले जाकर एक रूम बुक किया और उसको फोन करके अंदर बुला लिया
कमरे में अंदर जाते ही मैंने उसको कसके पकड़ लिया वो तो पहले से ही बहुत चुदासी थी इसी वजह से उसने भी मुझे कसके पकड़ लिया इसी हड़बड़ी में हम दोनों पास के पलंग पर गिर पड़े
मैंने उसे अपने नीचे दबा कर खूब चूसा
वो बोली- कपड़े खराब हो जाएंगे
मैं समझ गया हमने एक दूसरे के कपड़े निकाले पहले मैंने उसकी ब्रा का हुक खोलकर उसके निप्पलों को अपने होंठों में दबा लिया और मम्में मसलते हुए निप्पल चूसने लगा
वो बेकाबू होकर मुझे जकड़ते हुए मेरे सर को अपने दूध पर दबा रही थी कुछ देर बाद मैंने अपना मोर्चा नीचे सैट कर लिया उसकी चूत को खूब चूसा थोड़ी ही देर में वो उम्मम आह्ह्ह हाय ओह्ह्ह करती हुई स्खलित हो गई
फिर मैंने अपना 7 इंच का लंड उसके मुंह में देना चाहा तो साली ना करने लगी मैंने थोड़ा जोर दिया तो मान गई और मेरा लौड़ा चूसने लगी हम दोनों जल्दी ही 69 में हो गए
उसने चूसना बंद किया और बोली- जल्दी करो मुझसे अब कन्ट्रोल नहीं हो रहा
मैंने भी सोचा कि वक्त कम है निपट ही लो
मैंने उसको सीधा किया और चुदाई की पोजीशन बनाई सुपारा सैट करके धक्का मारा तो मेरा लंड फिसल गया मैंने लंड को वापस चूत की फांकों में सैट किया और जोर का झटका लगा दिया
वो जोर से चिल्ला दी मैंने हाथों से उसका मुंह दबाया और शांत रहा अब वो थोड़ी शांत हुई तो मैंने अपना काम शुरू किया हालांकि उसकी सील पहले से टूट चुकी थी
पर ज्यादा वक्त गुजर जाने की वजह से चूत अभी बड़ी टाइट थी उसकी सील टूटने की बात उसने मुझे बताई थी पर वो कहानी मैं बाद में बताऊंगा
मैंने अपना काम जारी रखते हुए उसे धीरे धीरे ढीला किया वो 2 मिनट बाद ही मेरे लंड से मजे लेने लगी थी हम दोनों के बीच धकापेल चुदाई होने लगी
मैं उसकी चूचियों को चूसते हुए उसकी चूत को रगड़ने में लगा था उसकी अकड़न मुझे बता रही थी कि लौंडिया अब झड़ने की कगार पर आ गई है
उसने इस वक्त मुझे कसके पकड़ा हुआ था मैं जोर जोर से उसकी चुदाई कर रहा था इसी बीच वो निकल गई और निढाल हो गई
मैं अभी भी पूरे जोरों से चुदाई कर रहा था उसकी गर्मी ने मेरे लंड को चिकनाई दे दी थी जिससे मेरे झटके और भी स्पीड से लगने लगे थे
इसी बीच वो फिर से चार्ज हो गई और गांड उठा उठा कर लंड के मजे लेने लगी करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ने के कगार पर आ गया था वो भी दूसरी बार होने को थी
मैंने उससे पूछा- कहां निकालूं?
तो वो बोली- अंदर ही निकालो मैं दवा ले लूंगी
उसके ऐसा बोलते ही मेरा खून जमा होने लगा मैं 10-15 करारे झटकों के साथ ही उसके अंदर ही झड़ गया चुदाई के बाद 10 मिनट तक हम दोनों ने आराम किया
फिर हम दोनों ने बाथरूम में जाकर आपने आपको साफ किया फिर अपने अपने कपड़े पहने और होटल से बाहर निकल आए
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