मैं अर्जुन वर्मा हूँ।
23 साल का, अभी-अभी ग्रैजुएशन करके पहली बार एक प्राइवेट स्कूल में मैथ्स पढ़ा रहा हूँ —
किताबें और chalk मेरी दुनिया थीं,
पर जिस दिन वो क्लास में दाख़िल हुई — दुनिया थोड़ी बदल गई।
ज्योति।
ज्योति लगभग 17-18 साल की रही होगी, बला की खूबसूरत जैसे उसके सामने बड़ी-बड़ी एक्ट्रेसेस फ़ैल हों जाये। गोरा बदन, छरहरी निगाहें, आँखों में काजल, बड़े-बड़े मम्मे। ऊपर से वो स्कूल ड्रेस की टाइट शर्ट और मिनी स्कर्ट जो की घुटने से ऊपर तक पहनती थी।
ज्योति हमेशा शर्ट की 2 बटन खोलकर और टाई थोड़ी ढीली रखती थी जिससे उसकी अंदर की खूबसूरती और निखर कर दिखती थी जैसे उसके पूरे बदन को दूध की मलाई से बनाई गयी हो।
उसकी आंखें मेरे सीधे आंखों में टकराईं —
ना शर्म, ना लिहाज़।
सिर्फ़ एक साफ़-सा इशारा:
“तुम नए हो, लेकिन मैं खेल पुराना जानती हूँ, सर।”
पहली क्लास में ही उसने सवाल कम पूछे, मुस्कराहट ज़्यादा दी।
और जैसे ही पीरियड ख़त्म हुआ, वो अकेले मेरी डेस्क के पास आई।
“सर, मैथ्स का एक डाउट था… थोड़ा पर्सनल टाइप है, खाली टाइम मिलेगा?”
मैंने सिर हिलाया — हाँ, लेकिन अंदर कुछ और ही हिला था।
शाम को, जब सब जा चुके थे, मैं स्टाफ रूम में कुछ पेपर्स चेक कर रहा था।
दरवाज़ा खुला, वो अंदर दाख़िल हुई।
“आपने हाँ कहा था… और मैं वादे तोड़ना पसंद नहीं करती।”
वो आगे बढ़ी, और मेरी टेबल के कोने पर बैठ गई।
स्कर्ट उसकी जांघों से थोड़ी ऊपर खिसक आई थी, और वो जानती थी ये हो रहा है — उसे रोकने का कोई इरादा भी नहीं था।
“सर, आपको देखकर अच्छा लगता है। कोई वजह नहीं चाहिए न, कुछ महसूस करने के लिए?”
मैंने कुछ कहने की कोशिश की, लेकिन आवाज़ अटक गई।
उसने मेरी टाई को सीधा किया, उंगलियाँ मेरी छाती के पास रुक गईं।
“डरिए मत… मैं सिर्फ़ सोच रही हूँ, अगर मैं आपकी उम्र की होती — तो आप क्या करते?”
मैं हिल भी नहीं पाया, जब उसकी उंगलियाँ मेरी उंगलियों को छूने लगीं — धीरे, नर्म, पर साफ़।
वो खेल रही थी — और मैं उस खेल का हिस्सा बन रहा था।
“सर, मुझे excitement पसंद है… thrill, जो दिन को यादगार बना दे।”
वो फुसफुसाई।
“और आप ना… dangerously sweet हो।”
उस दिन कुछ नहीं हुआ — बाहरी तौर पर।
पर जो अंदर हुआ, वो किसी सिलेबस का हिस्सा नहीं था।
फिर आया Annual Function का दिन।
रात का टाइम, सारा स्टाफ बिज़ी, बच्चे मेकअप और ड्रेसेस में।
वो पीछे वाले ड्रेसिंग रूम में खड़ी थी — हरे रंग की साड़ी में, जो किसी 18 साल की लड़की को नहीं, किसी खतरनाक इरादे को पहनाई जाती है।
“देखिए न सर, पल्लू सही लग रहा है?”
वो मेरी तरफ पीठ कर चुकी थी — और मैं समझ गया, ये सवाल कपड़े का नहीं है।
मैंने धीरे से उसके कंधे को छुआ, और पल्लू सीधा किया।
उसकी पीठ गर्म थी — मेरी उंगलियों के नीचे सांसों की रफ़्तार तेज़ होती गई।
“अगर कोई देख ले तो?” मैंने पूछा।
“तो आप कहिएगा… मैं फिसल रही थी, आपने संभाल लिया।”
उसने पलटकर कहा — मुस्कराहट नहीं, सीधी चुनौती।
उस रात function खत्म होने के बाद, मैंने गाड़ी स्टाफ को छोड़ने के लिए निकाली।
ज्योति रास्ते में मिली — अकेली।
“लिफ्ट दे देंगे, सर?”
मैंने भी हामी भरी और वो तुरंत दरवाजा खोलकर आगे की सीट पर बैठ गयी।
हमलोग थोड़े आगे बढे. .
उसने खिड़की से हवा में हाथ निकाले, और बोली —
“आप हमेशा इतने अच्छे रहेंगे, या कभी गलती भी करेंगे?”
मैंने धीमी आवाज़ में कहा,
“हो चुका हूँ शायद।”
वो मुस्कराई — और हाथ मेरे पैंट पर रख दी और मेरा लंड सहलाने लगी।
“तो फिर रुकिए मत, सर… जो अधूरा है, वो अधूरा ना रहे।”
मेरा भी लंड एकदम खड़ा हो गया और मैं खुद को रोक न सका।
मैंने भी गाडी धीमी कर के चलाने लगा और एक हाथ से उसकी चूची दबाने लगा।
मेरे हाथ लगाते ही जैसे उसके अंदर आग लग गयी। लेकिन गाडी में करना सेफ नहीं था इसलिए मैंने बोला चलो मेरे फ्लैट पर चलते हैं।
मैंने जैसे तैसे गाडी को अपने फ्लैट तक लेकर गया। जैसे ही फ्लैट के अंदर घुसी उसके अंदर मानों सनी लेओनी घुस गयी। उसने तुरंत ही अपना सारा कपडा उतार दिया।
मैं उसका शरीर देखकर बिलकुल अचंभित रह गया। उसका पूरा शरीर मानों किसी ने बड़ी शिद्दत से तराशा हो। इतनी सुन्दर और हॉट लड़की मैंने आजतक नहीं देखी थी।
मैं अभी ये सब सोच ही रहा था कि वो बोल पड़ी, “सिर्फ देखेंगे या कुछ करेंगे भी अर्जुन जी!”
उसने पहली बार मेरा नाम लिया था और तब मुझे अहसास हुआ उस समय हमलोग टीचर स्टूडेंट नहीं थे।
उसकी चूत एकदम सुर्ख गुलाबी जैसे असली गुलाब की पंखुड़ियाँ हों।
वो समझ गयी कि मैं उसका चूत देख रहा था उसने मुझे खींचकर बेड पर लिटाया और अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी।
मैं भी उसके चूत को चाटने लगा और उससे ज्यादा मजा मुझे आ रहा था क्योंकि ऐसी चूत शायद मैंने आजतक वीडियो में भी नहीं देखा था।
थोड़ी देर चूत चाटने के बाद ज्योति एकदम चरम पर पहुँच गयी और moan करने लगी। उसकी आवाज मेरे अंदर की आगे को और भड़का रही थी। मैंने उसे लेटने को कहा और वो तुरंत लेट कर अपने पैर फैला दिए। मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा।
वो बोली अब अंदर डाल दो अर्जुन ये चूत और ये ज्योति तुम्हारी ही है। ये सुनकर मैंने उसकी चूत में लंड डाल दिया। उसे थोड़ा तो दर्द हुआ, शायद ये उसका पहला sex था। थोड़ी देर छोड़ने के बाद खून निकलने लगा।
वो दबी आवाज में चीखी ((अया मां मर गई ओ माय गॉड … हट जाओ प्लीज दूर हट जाओ.)
मैं समझ गया कि ये सील टूटने का दर्द है और मैंने अपना लंड चूत से निकल कर उसका दूध चूसने लगा।
मैंने पूछा, “क्या ये तुम्हारा पहली बार है?”
उसने कहा, “रियलिटी में पहली बार बाकि सपनों में मैं रोज आपसे चुदती हूँ।”
ये सुनकर मुझे और जोश आया और मैं मैंने अपना लंड एक बार फिर उसकी चूत में डाल दिया और जोर जोर से चोदने लगा। वो बोली आराम से जान.. ये चूत तुम्हारी ही है.. पहली बार में ही फाड़ दोगे क्या।
वो जोर-जोर से सिसकियाँ ले रही थी.
मैंने कहा “मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि इतनी गुलाबी चूत को किसी ने अभी तक छुआ तक नहीं।”
वो मुस्कुरा कर बोली “चूत-चूत पर लिखा है चोदने वाले का नाम।”
और फिर आवाज करने लगी..
थोड़ी देर में उसका पानी निकल गया और वो ठंडी पड़ गयी
मैंने भी अपना सारा मख्खन उसके ऊपर गिरा दिया।
थोड़ी देर बाद मैंने उसका चूत एक कपडे से साफ़ कर दिया
फिर हम रातभर वैसे ही नंगे एक दूसरे से लिपटकर सो गए।
सुबह होकर मैंने पूछा कि तुम्हारे घरवाले ढूंढ़ रहे होंगे ?
नहीं मैंने पहले ही घर में बोल दिया था कि मैं स्नेहा के घर रुक जाउंगी अगर देर हुई तो, उसने कहा।
फिर मैंने उसे उसके घर पास ड्राप कर दिया और तैयार होकर स्कूल चला गया।