एक रात आंटी के मायके में

नमस्कार दोस्तों क्या आप एक नई कहानी के लिए तैयार हैं? आज की कहानी मेरी पड़ोसन आंटी के बारे में है पर रुकिए पहले जान लीजिए कि यह aunty chudai ki kahani सुना कौन रहा है

Aunty Chudai Ki Kahani

मेरा नाम सुनील है उम्र 22 साल दोस्तों के बीच अपनी हैंडसम पर्सनालिटी और अच्छे पारिवारिक बैकग्राउंड के लिए जाना जाता हूं

अपनी जवानी के इस पड़ाव पर कदम रखने के बाद से ही मेरा लंड मुझे चैन से नहीं बैठने देता है मैं रोज ही अपने लंड को हिलाता हूं इसकी प्यास बुझती ही नहीं है मुझे चुदक्कड़ आंटियां और प्यासी भाभियां बहुत पसंद हैं

यह sexy kahani मेरे कॉलेज के दिनों की है उन दिनों मैं रोजाना बस से ही कॉलेज आया-जाया करता था और आप तो जानते ही हैं कि सुबह के वक्त कॉलेज और ऑफिस जाने वालों की वजह से बसों का क्या हाल होता है पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती

उस दिन भी हमेशा की तरह मैं खचाखच भरी बस में अपने कॉलेज के लिए निकला था तभी अचानक मेरी नज़र पड़ी कि मेरे पड़ोस में रहने वाली आंटी भी उसी भीड़ का हिस्सा बनते हुए उसी बस में चढ़ रही थीं

आंटी ने मेरी तरफ देखा और मैंने आंटी की तरफ हम दोनों पास में ही खड़े हुए थे फिर कुछ दूर चलने के बाद बस में और ज्यादा लोग चढ़ गये अब बस बिल्कुल खचाखच भर गई आंटी की मोटी गांड मेरे लंड से आकर सट गई

जैसे ही मुझे इस बात का अहसास हुआ कि आंटी की गांड मेरे लंड से सट चुकी है तो मेरा लंड मेरी पैंट में खड़ा होना शुरू हो गया मैंने हल्का सा जोर लगा कर अपने लंड को आंटी की गांड की दरार पर मसल दिया

तभी अचानक आंटी ने पीछे मुड़कर देखा एक पल के लिए तो मेरा दिल हलक में आ गया और मैं बुरी तरह डर गया लेकिन अगले ही पल मेरी जान में जान आई जब उन्होंने मुझे देखकर एक प्यारी सी स्माइल दी फिर बड़ी शालीनता से मुझसे कहा- जरा मेरा यह बैग ऊपर रख दोगे?

तब जाकर मेरी जान में जान आई कि शुक्र है आंटी गुस्सा नहीं थीं मैंने तुरंत बिना देर किए उनका भारी बैग उठाया और ऊपर सामान रखने वाली जगह पर टिका दिया बैग हटने के बाद आंटी ने राहत की सांस ली और आराम से खड़ी हो गई

बस का सफर लंबा था इसलिए धीरे-धीरे हम दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया

मैंने बातों-बातों में आंटी से पूछ ही लिया कि वे इतनी सुबह कहां के लिए निकली हैं इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए बताया कि वे अपने मायके जा रही हैं

आंटी को इस तरह अकेले सफर करते देख मेरे मन का बचा-कुचा डर भी पूरी तरह गायब हो गया और मैं उनसे और भी खुलकर बात करने लगा बीच-बीच में जब धक्के लगते थे तो आंटी मुझसे बिल्कुल चिपक जाती थी

ऐसा करते करते मेरे लंड का तन कर बुरा हाल हो गया फिर मैंने महसूस किया कि आंटी भी अपनी गांड मेरे लंड पर धकेल रही थी वो अपनी गांड की दरार को मेरे लंड पर सटा कर पीछे की तरफ दबाव बना रही थी

मैं भी बदले में अपने लंड को उनकी गांड की दरार में पूरा का पूरा घुसाने की कोशिश करने लगा बहुत मजा आ रहा था मन कर रहा था अभी आंटी को नंगी करके चोद दूं

हालांकि भीतर ही भीतर मेरे लिए खुद को संभालना मुश्किल हो रहा था लेकिन मैंने जैसे-तैसे अपनी भावनाओं पर काबू पा रखा था

हम दोनों आपस में इस तरह बातें कर रहे थे मानो बाहर से सब कुछ पूरी तरह सामान्य और साधारण हो हमारे चेहरों को देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था कि मन में क्या चल रहा है

उसके कुछ पल के बाद आंटी ने अपना हाथ धीरे पीछे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी मेरी तो हवा टाइट हो गई आंटी भरी बस में मेरे लंड को पकड़ कर सहला रही थी

मैंने भी पूरा जोर लगा कर आंटी की तरफ अपने शरीर के वजन को आगे धकेल दिया हम दोनों इस कामुक मदहोश कर देने वाले पलों का मजा ले रहे थे

तभी मैंने सीट वाले डंडे पर अपने हाथ को आगे की तरफ रख लिया आंटी ने अपने मस्त चूचों को मेरी कुहनी के आगे वाले भाग की तरफ अपने चूचों को मेरे हाथ से सटा दिया और मेरे हाथ पर अपने चूचों को स्पर्श देने लगी

मैं पागल सा होता जा रहा था इधर आंटी के अंदर भी सेक्स पूरा भड़का हुआ था फिर मैंने आस पास देखा कि कोई हमारी इस हरकत पर ध्यान तो नहीं दे रहा

जब सब जगह नजर दौड़ाने के बाद मैंने ठीक ठाक पाया तो मैंने हल्के से अपने हाथ को आंटी के चूचों पर लाकर उनको छेड़ने लगा मेरे हाथ की उंगलियां आंटी के चूचों के निप्पलों पर लग रही थीं

आंटी की हल्की सी सिसकारी निकलना शुरू हो गई थी आंटी के चूचों के निप्पल काफी टाइट थे उसको छूकर पता नहीं चल रहा था कि वो दो बच्चों की मां है

मैंने जोर से उसके निप्पलों को मसलना शुरू किया तो आंटी बोली- आज मेरे साथ मायके ही चलो मैं तुम्हें अपने मायके की सैर करवाऊंगी

मैं भी समझ गया था कि आंटी मायके की नहीं अपनी चूत की सैर करवाने के मूड में लग रही है तभी अचानक आंटी ने अपने पर्स से फोन निकाला और किसी को डायल किया उन्होंने अपने घर वालों को फोन पर जो कहा उसे सुनकर मेरे होश उड़ गए

उन्होंने सामने वाले से कहा कि वे अकेली नहीं हैं बल्कि उनके साथ मैं यानी सुनील भी उनके मायके आ रहा है मैं हैरान रह गया कि आंटी ने इतनी आसानी से मेरा प्लान ही बदल दिया

आंटी के बदन को छेड़ते छेड़ते सफर कब कट गया हमें पता ही नहीं चला उनके घर पहुंचने के बाद सफर की थकान मिटाने के लिए हम दोनों ने कुछ देर आराम किया

घर में सब कुछ शांत था लेकिन मेरे मन की बेचैनी बढ़ती जा रही थी अब मुझसे रात होने का इंतजार करना मुश्किल हो रहा था कि आगे क्या होने वाला है

उनके घर पर मेहमानों की तरह मेरी खूब खातिरदारी की गई चाय-नाश्ते और बातचीत के बीच आखिरकार रात हुई और सोने का समय भी आ ही गया

घर में जगह की कमी या जो भी वजह रही हो आंटी और मेरे सोने की व्यवस्था एक ही कमरे में की गई थी उस कमरे में कदम रखते ही मेरी धड़कनें तेज हो गई ये सोच कर मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा होने लगा था

मेरे लंड ने कई बार चिपचिपा पदार्थ छोड़ दिया आंटी की चूत के बारे में सोच कर ही मेरा कामरस निकला जा रहा था लेकिन तभी उसकी मां हमारे बीच में आ गई वो अपनी बेटी से बात करने के लिए हमारे कमरे में ही आ गयी

मैं मन ही मन उसकी मां को गालियां देने लगा मगर कमरे का नजारा देखकर मुझे अपनी उम्मीदों पर थोड़ा काबू पाना पड़ा दरअसल हम दोनों के सोने की व्यवस्था जमीन पर एक साथ बिस्तर लगाकर की गई थी

जबकि कमरे के सिंगल बेड पर आंटी की मां सोने वाली थीं आंटी की मां की मौजूदगी के कारण माहौल में एक अजीब सी खामोशी और मर्यादा बनी हुई थी

बिस्तर पर लेटने के बाद वो दोनों आपस में धीमी आवाज़ में बातें करने लगीं कुछ देर बाद कमरे की लाइट बुझा दी गई लेकिन अंधेरे में भी उनकी फुसफुसाहट जारी थी

मैं तो पहले से ही आंखें बंद किए सोने का नाटक कर रहा था ताकि उनकी बातों को ध्यान से सुन सकूं और आंटी की मां को मुझ पर शक न हो

जैसे ही लाइट बंद की गई मैंने धीरे अपने और आंटी के बदन को चादर के नीचे ढक लिया और मैं आंटी की गांड के साथ चिपक गया ज्यादा कुछ हरकत तो नहीं हो सकती थी क्योंकि उसकी मां को हमारे बारे में पता चल जाता

मैं धीरे-धीरे आंटी की गांड को अपने हाथ से दबाने लगा मैंने अपने लंड को साड़ी के ऊपर से ही आंटी की गांड से सटा रखा था आंटी बातों में लगी हुई थी

फिर मैंने धीरे से उसकी साड़ी को ऊपर करना शुरू कर दिया अंधेरे में कुछ पता नहीं चल रहा था लेकिन उसकी चिकनी टांगों पर उंगलियां फिराते हुए मुझे बहुत मजा आ रहा था

जब पूरी साड़ी ऊपर तक आ गई तो मैं अपने पैरों को उसकी जांघों से घिसने लगा फिर मैंने उसकी भारी सी गांड में फंसी हुई छोटी सी जालीदार पैंटी को उसके कूल्हों के बीच से उंगली घुसाते हुए खींच दिया

उसके बाद मैंने अपने अंडरवियर को भी नीचे किया और उसकी पैंटी के अंदर लंड को लगा कर उसकी जांघों के बीच में आंटी की चूत के पास फंसा दिया मेरा लंड आंटी के चूतड़ों में जाकर सट गया

मेरे तने हुए लंड की छुअन से आंटी की हल्की सी आह्ह निकली लेकिन आंटी ने खुद को रोका हुआ था वो अपनी मां को बातों में लगाए हुए थी और साथ में ही मेरे लंड का मजा भी ले रही थी

मैं अपने लंड को उसकी गांड पर घिसने लगा आंटी मेरा पूरा साथ दे रही थी कुछ देर जब ऐसे ही घिसते हुए हो गई तो आंटी ने धीरे अपने हाथ पर थूक लगाया और अपना हाथ अपनी जांघों के बीच में लाकर मेरे लंड के सुपारे पर थूक को मलते हुए उसको चिकना करने लगी

आंटी ने मेरे लंड को पूरा चिकना कर दिया मेरे लंड के सुपारे पर जब आंटी के हाथ घिस रहे थे तो मैं आंटी की चूत को चोदने के लिए जैसे मरा जा रहा था

मेरे लंड के सुपारे में एक अजीब सी सरसराहट दौड़ रही थी फिर आंटी ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत के मुंह पर लगा कर अपनी गांड को पीछे धकेल दिया मुझे आंटी का इशारा मिल गया

मैंने अपने लंड को आंटी की चूत पर सटे हुए आगे की तरफ एक हल्का सा धक्का मारा और मेरा लंड आंटी की गर्म चूत में घुस गया उम्म्ह अहह हय ओह मजा आ गया

आंटी की गर्म चूत में जाते ही मैंने उसकी कमर को अपने हाथों में थाम लिया और बिल्कुल धीरे-धीरे अपनी गांड को हिलाते हुए मैं आंटी की चूत में धक्के लगाने लगा आंटी भी हल्के हल्के अंदाज में अपनी गांड को मेरे लंड की तरफ धकेल रही थी धीमी चुदाई शुरू हो गई

आंटी की चूत में जाते ही मेरा लंड और ज्यादा गर्म और टाइट हो गया था आंटी की चूत ने जैसे मेरे लंड को अंदर ही जकड़ लिया था मैं धीरे से लंड को बाहर लाता और फिर हल्के से धक्के के साथ आंटी की चिकनी चूत में फिर से धक्का लगा देता

पूरा लंड आंटी की चिकनी चूत की गहराइयों में उतरने लगा उसकी चूत की पंखुड़ियां जैसे मेरे लंड को निचोड़ने में लगी हुई थी मुझे जैसे जन्नत का मजा मिल रहा था

कुछ देर तक ऐसे ही करने के बाद मुझसे रहा न गया और मैंने अपने मोटे लंड जोर से आंटी की चूत में पेल दिया तो आंटी की आह्ह निकल गई

उसकी ऐसी आवाज सुनकर उसकी मां बोली- क्या हुआ?

आंटी बोली- कुछ नहीं ऐसा लग रहा था जैसे पीछे कुछ चुभ रहा हो

उसकी मां बोली- लाइट जला कर देख लो

आंटी तपाक से बोली- नहीं मां सब ठीक है

आंटी को भी डर हो गया था कि अगर लाइट जली तो सारा मजा खराब हो जायेगा इसलिए उसने बात को तुरंत संभाल लिया उसके बाद वो दोनों फिर से बातों में लग गई

कुछ देर तक मैंने आंटी की चूत में लंड डाल कर मजा लिया और फिर मैं आंटी की गांड के छेद पर भी उंगली चलाने लगा आंटी ने अपनी दोनों जांघों को थोड़ा सा और खोल दिया और मेरी उंगली आंटी की गांड में चली गई आंटी उचक सी गई

लेकिन उसने कोई आवाज नहीं की एक दो बार मैंने आंटी की गांड में उंगली की और फिर वापस निकाल ली

फिर पता नहीं आंटी को क्या शरारत सूझी कि उसने अपने एक हाथ को पीछे लाकर मेरी गांड पर टटोलते हुए मेरी गांड के छेद को ढूंढ लिया और अपनी उंगली मेरी गांड में घुसाने की कोशिश करने लगी

मुझे मजा तो नहीं आ रहा था लेकिन मेरे लिए यह एक नया अनुभव था मेरा लंड आंटी की चूत में था और आंटी की उंगली मेरी गांड के छेद को सहला रही थी फिर उसने अपने हाथ को वापस आगे की तरफ खींच लिया

मुझे गांड में जलन सी होने लगी शायद आंटी की उंगलियों का तेज नाखून मेरी गांड में लग गया था मैंने जोर से आंटी की चूत को चोदना शुरू कर दिया पच-पच की आवाज हो गई तो उसकी मां को फिर शक हो गया

वो बोली- ये आवाज कैसी आ रही है?

आंटी बोली- कुछ नहीं सुनील को शायद मच्छर परेशान कर रहे हैं वो मच्छर मार रहा है

मैंने फिर से अपने धक्कों को धीमा कर दिया जोर से चुदाई होना अभी संभव नहीं था मैं धीरे-धीरे ही आंटी चूत में लंड को चलाता रहा आंटी भी पूरे रिदम में मेरा साथ देती रही

दोस्तो इस तरह धीमी चुदाई करने में भी बहुत मजा आता है जिन लोगों ने इस तरह से प्यार वाली धीमी चुदाई का मजा लिया है वो जानते होंगे कि इस तरह की चुदाई में ताबड़तोड़ चुदाई से ज्यादा रस मिलता है

आंटी की चूत रस छोड़ते हुए पूरी चिकनी हो गई थी उसकी चूत में लंड डालते हुए अब मुझे ऐसा लगने लगा था कि जैसे मैं किसी मक्खन के कटोरे में लंड को डाल रहा हूं

गर्म चिकनी चूत की चुदाई का जो मजा आंटी उस रात को मुझे दे रही थी उसको अपने शब्दों में मैं लिख नहीं पा रहा हूं मैं जोर से उसकी चूत को फाड़ देना चाहता था

लेकिन ऐसा नहीं कर पा रहा था फिर मैंने उसके चूचों को पकड़ लिया और उसको कस कर बांहों में भरते हुए उसके चूचे भी साथ में दबाने लगा आंटी का पूरा बदन मेरे बदन से सट गया था उसके मोटे चूचे दबाते हुए मैं उसकी चूत में धीरे-धीरे लंड को घिसता रहा

काफी देर तक ऐसे ही हम पड़े-पड़े हिलते रहे आंटी की आवाज भारी होने लगी थी उसकी आवाज से कामुकता साफ झलक रही थी लेकिन अपने आप को कंट्रोल करके रखे हुए थी उसकी मां को भी नींद नहीं आई थी

अब आंटी से जब रुका नहीं गया तो उसने पीछे हाथ लाकर मेरे चूतड़ों को अपने हाथों में पकड़ लिया और मेरी गांड को आगे की तरफ धकेलते हुए अपनी चूत के अन्दर मेरे लंड के धक्के मरवाने लगी

मैं आंटी की बेबसी समझ सकता था अगर उसकी मां वहां पर न होती तो मैं आंटी की चूत को फाड़ कर रख देता लेकिन हम दोनों ही मजबूर थे मैंने भी थोड़ा और अंदर तक लंड को घुसाने की कोशिश की

आंटी की गांड काफी भारी थी इसलिए लंड पूरा जड़ तक आंटी की चूत में नहीं उतर रहा था या फिर आंटी को और गहराई तक लंड लेने की आदत थी वो बार-बार मेरी गांड को अपने हाथों के सहारे से अपनी चूत की तरफ धकेल रही थी

उसकी आवाज लड़खड़ाने लगी थी लेकिन वो ऐेसे बर्ताव कर रही थी जैसे वो नींद आने के चलते बड़बड़ा रही है ताकि उसको मां को इस बात का शक न हो जाये कि उसकी बेटी एक मोटे और लंबे लंड के साथ नीचे फर्श पर पड़ी हुई अपनी चूत की चुदाई करवा रही है

फिर मैंने तेजी से लंड को आंटी की चूत में चलाना शुरू कर दिया मैंने आंटी को कस कर पकड़ लिया और तीन चार जोर के धक्के लगा दिये और फिर मेरे लंड ने जवाब दे दिया

मेरे लंड से गर्म गर्म वीर्य निकल कर आंटी की चिकनी चूत में भरने लगा मैं झटके मारते हुए आंटी की चूत में वीर्य को गिराता चला गया

मैंने सारा का सारा वीर्य उसकी चूत में खाली कर दिया आंटी ने जैसे मेरे लंड को अपनी चूत में दबोच लिया था ऐसा लग रहा था कि वो भी झड़ गई है

फिर हम दोनों नॉर्मल होते आ गये अभी तक भी उसकी मां नहीं सोई थी मुझे गुस्सा आ रहा था लेकिन मैं चुपचाप आंटी की चूत में लंड को डाले हुए लेटा रहा

जब काफी देर तक की उनकी बातें खत्म नहीं हुई तो मैंने आंटी को अपनी बांहों में भर लिया और अपने लंड को ऐसे ही उनकी चूत में रख कर सो गया

सुबह जब उठा तो मैं अकेला ही वहां पर सोया हुआ था मैंने उठ कर देखा तो चादर मेरे ऊपर थी और मेरा लंड अभी भी बाहर ही लटक रहा था लेकिन अब सोई हुई अवस्था में था इसलिए चादर के नीचे से पता नहीं लग रहा था

वो दोनों मां-बेटी वहां कमरे में नहीं थी फिर मैं आंटी के साथ ही अपने घर पर वापस आ गया अब जब भी कभी मुझे मौका मिलता है मैं आंटी को कॉल कर लेता हूं मुझे वो सेक्सी चुदक्कड़ आंटी पूरे मजे देती है

अब तो मैं सोच रहा हूं कि कॉल ब्वॉय का धंधा ही शुरू कर दूं मुझे भाभियों और आंटियों की चूत भी मिल जाया करेगी और इस तरह से मेरी चुदाई की इच्छा पूरी होने के साथ ही मेरी कुछ कमाई भी हो जाया करेगी

तो दोस्तों यह थी आंटी के मायके के सफर और उस रात की कहानी आपको मेरी यह aunty chudai ki kahani कैसी लगी? उम्मीद है कि इस आंटी की sexy kahani ने आपको बांधकर रखा होगा

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